Amarendra Singh

Halka Halka Swag

From Diary of Amarendra Singh
Writer | Blogger | Software Engineer
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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तेरा नाम….

इन हाथों की लकीरों मे मैने देखा है तेरा नाम, इन ख्याबो के महलो का मैने रखा है तेरा नाम. है नाम तेरा मेरी हर इक साँस मे समाया, ज़िंदगी के हर लम्हे पर मैने लिखा है तेरा नाम. ये मै जनता हु या रब जनता है, ये मै...

कुछ यू मिली नज़र उनसे

कुछ यू मिली नज़र उनसे के हाल सारा दिल का बता दिया . हमने पूछा भी ना था जो सवाल कभी , जवाब उन्होने इशारो मे बता दिया. कभी झूखी नज़र तो कभी लब मुस्करा गये, कभी झूखी नज़र तो कभी लब मुस्करा गये, कभी देखा ऐसे पलट के...

आज फिर आइने मे मुझे उसकी तस्वीर नज़र आई है

  ये जो सिली सिली सी इक हवा आई है ऐसा लगता है जैसे उसको मेरी याद आई है ज़ख़्म उसके भी हरे हो गयें होंगे शायद मेरे लबों पर जो उसकी बेवफ़ाई की बात आई है कही सहराओं में बैठ कर वो तन्हाई ना ढूंढ रहा हो मुझको खामोशियों में...

तेरा चहेरा आज भी मुझे याद है

तेरी गली आज भी मुझे याद है, तेरा शहर आज भी मुझे याद है, ये न समझ की भूल गया हु मै तुझे, तेरा चहेरा आज भी मुझे याद है. याद है मुझे वो तेरा हस के मुस्कुराना, देखना मुझको ही फिर मुझसे ही नजरें चुराना, तेरी हर इक अदा आज भी...

कुछ इस कदर मुझ पर ये रहम हो जाये

कुछ इस कदर मुझ पर ये रहम हो जाये, मेरे नाम के पीछे, तेरा नाम जुड़ जाये. बस जाये तू मेरी साँस मे खुशबू की तरहै, आईना मै देखुं, और चहेरा तेरा नज़र आये. हर घड़ी हर लम्हा बन के साया रहे तू साथ मेरे, चैन दिन का, तो नींद रातों...

दूरी बढ़ने से कभी रिश्ते टूटा नहीं करते

दूरी बढ़ने से कभी रिश्ते टूटा नहीं करते, जो दिल मे बसते है वो यादों से जुदा हुआ नहीं करते. ये माना की मंजिले अलग हो गई है हमारी, मगर साथ चलने वाले कभी अपनों को भूला नहीं करते. मेरी हर दुआ में तेरा ज़िक्र आयेगा जरूर, तेरी...

शहादत

यूँ शहादत को किसी की तुम मजहबों से न देखो यारों, सर कटे थे कई, इक आजादी पाने के लिये. किसी ने अपनों को था गवाया, तो कोई जीता राहा ज़िंदगी किसी के इंतजार मे, घर जले थे कई, इक नया आशियाँ बनाने क लिये. थी चूमी हस के फांसी...

इक तेरे आने से पहले और इक तेरे जाने के बाद

मौत आती नही मुझको मगर ये साँस थम सी जाती हैं, दिल की गहराई मे ना जाने क्यो इक बेचैनी सी छा जाती हैं. लफ्ज़ कह जाते है मुझसे कुछ अनकही सी बाते, कुछ अनसुनी सी बाते ये हवाये बता जाती हैं. सर्द रातों मे अब अक्सर बैठे रहता हु...

Amarendra Singh

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