Amarendra Singh

वो गले लगे भी मेरे, तो किसी और की याद में….

वो गले लगे भी मेरे, तो किसी और की याद में,
ना चाहते हुये भी मुझे, गले से उसे लगाना पड़ा.

वो रो रहे है जिस की खातिर, वो मै नहीं कोई और है,
ना चाहते हुये भी मुझे, सीने से उसे लगाना पड़ा.

उसकी आखों में आसूं, मैनें देखे नही थे पहले कभी,
ना चाहते हुये भी मुझे, दर्द अपना दिल में दबाना पड़ा.

मेरी दुआ है ये की वो खुश रहे मुझको बर्बाद करके भी,
तो क्या हुआ अगर उसकी खातिर, घर मुझको अपना जलाना पड़ा.

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Khushi
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Khushi

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Keshav Verma
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Keshav Verma

Bhai kha se dimag aa raha hai..

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