Amarendra Singh

शहादत

यूँ शहादत को किसी की तुम मजहबों से न देखो यारों,
सर कटे थे कई, इक आजादी पाने के लिये.

किसी ने अपनों को था गवाया,
तो कोई जीता राहा ज़िंदगी किसी के इंतजार मे,
घर जले थे कई, इक नया आशियाँ बनाने क लिये.

थी चूमी हस के फांसी किसी ने,
तो किसी ने मौत को था खुद से गले लगाया,
दी शहादत वतन के वास्ते, ये खुला आसमान पाने के लिये.

कोई जा कर के अब ये उनसे कह दो, जो सियासी चाल चलते है,
कभी हिंदू, कभी मुस्लिम, कभी सिखों की बात करते है ,
समंदर मे सफ़र करने वाले कभी तूफानों से नहीं डरा करते,
वतन पर जा निछावर करने वाले कभी मज़हब की बात नहीं किया करते.

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Amarendra Singh

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KhushiAnkitPranav Recent comment authors
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Pranav
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Pranav

Awesome man

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Khushi
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Khushi

Awesome lyrics… What a thought..

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Ankit
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Ankit

Jai Hind ….. awesome lines#

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Khushi
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Khushi

Wah kya baat Hai… Bahut khoob

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