Amarendra Singh

मेरे जख्मों पर मरहम लगाने से पहले….

मेरे जख्मों पर मरहम लगाने से पहले,
बस इतना बता दे मुझको भूल जाने से पहले…

क्या खता मेरी थी, या वक़्त का था इसमें कोई कसूर,
क्यों दिल को लगाया था तूने, दिल तोड़ जाने से पहले…

अब जब हो गया हूं राख मैं, क्यों तुम मुझको बुझाने लगी हो,
अब जब भूल गया हूं मैं खुद को, क्यों तुम इतना याद आने लगी हो…

सजा क्या ये कम है, कि हम आज भी जी रहे है तेरी बेरुखी के संग,
क्यों पूछ कर अब हाल मेरा, तुम फिर से इश्क़ जताने लगी हो…

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