Amarendra Singh

कुछ इस कदर मुझ पर ये रहम हो जाये

कुछ इस कदर मुझ पर ये रहम हो जाये,
मेरे नाम के पीछे, तेरा नाम जुड़ जाये.

बस जाये तू मेरी साँस मे खुशबू की तरहै,
आईना मै देखुं, और चहेरा तेरा नज़र आये.

हर घड़ी हर लम्हा बन के साया रहे तू साथ मेरे,
चैन दिन का, तो नींद रातों की मेरी खो जाये.

और कभी आये ना वो घड़ी ज़िंदगी मे मेरी,
जिस घड़ी मुझको “अमर” तेरी याद ना आये.

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