Amarendra Singh

ख़त आज भी संभाल कर रखें है मैने तेरे

ख़त आज भी संभाल कर रखें है मैने तेरे,
माना कि ये मुझे चैन से सोने नहीं देते.

दिला जाते है ये याद बीते हुये लम्हों की,
मै भूलना भी चाहुँ, ये तुझे भूलने नहीं देते.

हर घड़ी हर लम्हा तू रहती है मेरे ख्याब मे,
सहराओं मे भी ये मुझे तन्हा रहने नहीं देते.

कुछ इस क़दर बस गई है तू मेरी साँस मे,
मै मरना भी चाहुँ, तो ये मुझे मरने नही देते.

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