Amarendra Singh

कभी कुछ अपने हुए पराये

कभी कुछ अपने हुए पराये,
कभी कुछ परायों में मुझे कोई अपना मिला|
कभी कुछ सपने रहे अधूरे,
कभी कुछ सपनों के टूटने का मुझको ग़म मिला|
दिए फूलों ने कभी मुझको ज़ख्म गहरे, कभी कांटों के चुभने से मुझको सुकून मिला|
मंजिलें मिली तो हमसफ़र खो गए, कभी हमसफ़र के होने पर भी मुझे कोई रास्ता ना मिला|
सोचा देख लूं पलट कर पीछे अपनी ज़िंदगी को,
मैंने बीते लम्हों में क्या खोया क्या पाया|
हर ख़ुशी में मेरी तेरा साया साथ था मेरे,
हर ग़म में मैंने बस तुझको ही अपने पास पाया|

0
Amarendra Singh

Amarendra Singh

Leave a Reply

avatar

Amarendra Singh

Follow Me

Halka Halka Swag Halka Halka Swag Halka Halka Swag