Amarendra Singh

हर रोज खोलता हूँ मैं किताबें कुछ पढ़ने के बहाने…

हर रोज खोलता हूँ मैं किताबें कुछ पढ़ने के बहाने,
हर रोज तेरा चेहरा मुझको किताबों में नज़र आ जाता है…

तूने जो दिया था फूल मुझको पहली मुलाक़ात पर,
आज भी उसमे से मुझको तेरा अक्श नज़र आ जाता है…

ये हवाये छूकर आई है शायद तुझको,
ये मौसम आज भी मेरे दिल मे इक आग लगा जाता है…

कभी चूमता हूँ तो कभी सीने से लगाता हूँ खत तेरे,
कभी देखता हूँ फ़लक पे तो तेरा साया नज़र आ जाता है…

और कुछ इस कदर बस गई है तू अब मेरी सांस में,
और कुछ इस कदर बस गई है तू अब मेरी सांस में,
कोई पूछता है जब नाम मेरा, तो नाम तेरा जुबां पर आ जाता है…

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Parveen
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Parveen

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Khushi
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Khushi

Bahut khoob

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Vijay
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Vijay

Dil cheer diya Ktaiiii…

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Loveleen
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Loveleen

Awesome

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