Amarendra Singh

इक तेरे आने से पहले और इक तेरे जाने के बाद

मौत आती नही मुझको मगर ये साँस थम सी जाती हैं, दिल की गहराई मे ना जाने क्यो इक बेचैनी सी छा जाती हैं.

लफ्ज़ कह जाते है मुझसे कुछ अनकही सी बाते, कुछ अनसुनी सी बाते ये हवाये बता जाती हैं.

सर्द रातों मे अब अक्सर बैठे रहता हु खिडकिया खोले, बंद कमरों मे नजाने क्यों सावन की बूंदे आग लागा जाती हैं.

कभी ख़ुद से तो कभी आईने से करता हु बाते, कभी देख कर तसवीर तेरी मेरी रातों की नींद खो जाती हैं.

ओर जो कभी मिले फुरसत तो आके देख ले, कैसे जीता हु मैं मर मर के तुझसे दिल लगाने के बाद.

इक तेरे आने से पहले,

   और इक तेरे जाने के बाद….

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