Amarendra Singh

एक और पुकार…

मुझको दफना दो चाहे, या बहा दो अब किसी नदी में,
मेरे बदन पर लगी ये आग, अब बुझती नहीं है बुझाने से…

वो लोग जो जाग जाते थे, किसी की इक आहट से,
वो लोग अब जागते नहीं है, मेरे इतना चिल्लाने से…

लेकर दिया अपने हाथों में, अब तो हर कोई घूम रहा है,
ना जाने तब क्यों नहीं नज़र आये, मेरे इतना बुलाने से…

ये इक दो दिन का शोर है, कल फिर वही दोर आयेगा,
ये इक दो दिन का शोर है, कल फिर वही दोर आयेगा,
अब तो मर चुकी हूँ मैं, अब क्या फ़ायदा आँसू बहाने से…

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Pranav Kumar Verma
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Pranav Kumar Verma

Well Penned sir…

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Ankit
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Ankit

Touching…..

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Khushi
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Khushi

Very emotional…

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Awesome post! Keep up the great work! 🙂

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Amarendra Singh

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