Amarendra Singh

इक मुद्दत सी हो गई है मुझको आईना देखे….

इक मुद्दत सी हो गई है मुझको आईना देखे,
अब तो खुद को पहचान ना भी नामुमकिन सा लगता है.

दीवारों ने भी छोड़ दिया है मुझसे बातें करना,
अब तो अपनों में भी मुझको हर कोई बेगाना सा लगता है.

हर सांस में घुट घुट के जी रहा हू मैं ना जाने क्यों,
अब तो जीना भी मुझको मरने से बत्तर लगता है.

हर रोज उस से मिलने की चाह बचा लेती है शायद अमर,
मैं अब तक ज़िंदा हूँ, ये उसकी दुआओ का असर लगता है.

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Amarendra Singh

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Pranav
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Pranav

Dard to ….. Kaafi gehra lagta hai

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Khushi
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Khushi

Beautiful lyrics

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Satnam singh
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Satnam singh

Oho super

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Avika
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Avika

Very Nice Poetry

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Naveen Bahuguna
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Naveen Bahuguna

Ek na ek din mil hi jayegi veere

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Loveleen
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Loveleen

Awesomeeeeee

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