Amarendra Singh

आज फिर वही आँसु है, आज फिर वही तन्हाई है

आज फिर वही आँसु है, आज फिर वही तन्हाई है.
हर शाम की तरहै, आज फिर मुझे तेरी याद आई है.

हर घड़ी सोचता हूँ, कि भूल जाऊंगा मै तुझे कल से.
हर लम्हा ना जाने क्यों, फिर मुझे तेरी याद आई है.

ये हवायें लेकर आई है फिर से पैगाम तेरा.
आज फिर इन फ़िज़ाओं में, इक मायूसी सी छाई है

हर रोज डूबता हूँ मैं, महखाने में इस करद.
हर रोज मुझको पैमाने मे, तेरी तस्वीर नज़र आई है.

और इश्क़ मे तेरे, कब का फ़ना हो गया होता अमर,
आज फिर मुझे तेरे लोट आने की उम्मीद नज़र आई है.

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