Amarendra Singh

अभी वक़्त तुम्हरा है

अभी वक़्त तुम्हरा है, इस लिये हम खामोश बैठे है.
मगर मेरी ख़ामोशी को, तुम मेरी कमजोरी मत समझना.
तूफां आने से पहले भी, कुछ यही मंज़र होता है.
हमे अपने से ज्यादा नहीं, तो खुद से कम भी मत समझना.

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