Amarendra Singh

आहिस्ता आहिस्ता

कुछ यू बसर कर ली है मैंने ज़िंदगी तन्हा, आहिस्ता आहिस्ता,
गम ए उल्फतों को पी लिया है मैंने खुद से, आहिस्ता आहिस्ता,
आहिस्ता आहिस्ता हर दर्द ने है मुझको मुस्कुराना सिखाया,
हर ज़ख्म को सिल लिया है मैंने खुद से, आहिस्ता आहिस्ता .

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