Amarendra Singh

आहिस्ता आहिस्ता

कुछ यूं बसर कर ली है मैंने ज़िंदगी तन्हा, आहिस्ता आहिस्ता,
ग़म ए उल्फतों को पी लिया है मैंने खुद से, आहिस्ता आहिस्ता|
आहिस्ता आहिस्ता हर दर्द ने है मुझको मुस्कुराना सिखाया,
हर ज़ख्म को सिल लिया है मैंने खुद से, आहिस्ता आहिस्ता|

0
Amarendra Singh

Amarendra Singh

Leave a Reply

avatar

Amarendra Singh

Follow Me

Halka Halka Swag Halka Halka Swag Halka Halka Swag